मंगळवार, २४ जानेवारी, २०१२

किसीने कुछ बनाया था। किसीने कुछ बनाया है।

किसीने कुछ बनाया था। किसीने कुछ बनाया है।
कही मंदिर की परछाई। कही मस्जिद का साया है।

ना तब पुछा था हमसे। ना अब पुछने आए है।
हमेशा फैसले करके। हमे युही सुनाया है।

किसीने कुछ बनाया था। किसीने कुछ बनाया है।

हमे फुरसत कहाँ। रोटी की गोलाई की चक्करसे।
न जाने किसका मंदिर है। न जाने किसकी मस्जिद है।

न जाने कौन उलझाता है। सिधे सच्चे धागो को।
न जाने किसकी साजिश है। न जाने किसकी यह जिद है।
अजिब सा सिलसिला है। न जाने किसने यह चलाया है।

किसीने कुछ बनाया था। किसीने कुछ बनाया है।

वो कहते है तुम्हारा है। जरा तुम एक नजर डालो।
वो कहते है बढो,माँगो। जरूरी है, न तुम टालो।

मगर अपनी जरूरत है। बिल्कुल अलग इससे।
जरा ठहरो, जरा सोचो। हमे साचों मे मत ढालो।
बताओ कौन यह शोला। मेरे आँगन मे लाया है।

किसीने कुछ बनाया था, किसीने कुछ बनाया है

अगर हिंदू में आँधी है। अगर तुफान मुसलमान है।
तो आओ आँधी तुफान यार बनके। कुछ नया कर दिखाए।

तो आओ, एक नजर डालो।अहं से सवालो पर।
कई कोने अंधेरे है। मशालो को दिया कर दे।
अब असली दर्द बोलेंगे। जो सिनो मे छुपाया है।

किसीने कुछ बनाया था। किसीने कुछ बनाया है।

 - प्रसुन जोशी